मंगलवार, 23 मार्च 2010

ज़रा याद करो क़ुर्बानी- 2

मुझे अब पक्का यक़ीन हो गया है कि कुछ दिनों बाद हम चाचा नेहरु और गांधी जी को भी भूल जाएंगे...  आप सोच रहे होंगे कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हुं??  इसका कारण है कि आज फिर हम उन स्वतंत्रता सेनानियों को भूल गए जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की परवाह किए बिना शहीद हो गए.., पहले नेताजी, फिर लाला लाजपत राय, फिर आज़ाद और अब भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को भूल गए...  जी हां.. आज 23 मार्च है... यही वो मन्हूस दिन है जब देश ने अपने तीन महान सपूतों को खो दिया... भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को अंग्रेज़ी सरकार ने फांसी पर लटका दिया था... और इन तीनों ने भी फांसी के फंदे को हंसते हुए चुम लिया.... ऐसे वीरों को शत्-शत् नमन...... लेकिन आज हम उन लोगों को याद करने से भी कतरा रहे हैं जिनकी वजह से हमें आज़ादी का स्वाद चखने को मिला.... आज हमने इन शहीदों को भूला कर अपनी कृतघ्नता का परिचय दिया है.... बस एक सरकारी विज्ञापन समाचार पत्रों में जारी किया गया और हमारा काम ख़त्म..... क्या हमारा दायित्व नहीं बनता कि हम ऐसे लोगों को अपने दिल में जगह दें???  23 साल यही उम्र थी भगत सिंह जब उन्होंने देश के अपनी जान दे दी... मैं सोचता हुं 23 साल में तो मैं कुछ भी नहीं कर सका.... मगर भगत सिंह तो देशभक्ती का जज़्बा लेकर पैदा हुए थे..... इन वीरों ने हमें बतलाया था कि देश की सेवा के लिए अगर फांसी पर भी चढ़ना पड़े तो हंसते- हंसते चढ़ जाओ... मगर उनकी बातों पर अमल करना तो दूर हम उन्हें ही भूल गए जिन्होंने हमें ये सिखाया... हमने सोचा अगर उन्हें याद रखा तो उनके बताये हुए मार्ग पर चलना पड़ेगा.. बेहतर होगा कि हम उन्हें ही भूल जायें......

1 टिप्पणी: