आज हम अपने देश का 60वां गणतंत्रता दिवस मना रहे हैं.... आज भारत का हर एक नागरिक अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा है.... आज देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के पावन उपलक्ष्य पर झांकीयां निकालीं गईं और भारत ने राजपथ पर अपना शक्ति प्रदर्शन किया..... पुरे देश वासियों के साथ साथ पुरी दुनिया ने भारत की ताकत को देखा...... यहां एक बात मेरे ज़ेहन में आ रही है कि साठ साल की उम्र के बाद लोग सीनियर सिटिजन कहलाने लगते हैं..... इस लिहाज से हमारा गणतंत्र आज सीनियर सिटिजन हो गया है...... देश तो सदियों से है और दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं को एक आधुनिक लोकतांत्रिक गणतंत्र बने आज साठ साल हो गए.... क्या कहा जाए इस गणतंत्र को साठ साल का जवान या साठ साल का वरिष्ठ नागरिक???? अगर भारत की जनसंख्या के हिसाब से बात करें तो भारत की आधी से ज्यादा आबादी जवानों की है..... तो इस लिहाज से भारत जवान है...... लेकिन भारत जब से गणतंत्र बना तब से आज तक बागडोर बुजुर्गों के हाथ में है तो क्या भारत बूढा हो गया....... मुझे लगता है कि सचमुच भारत बूढा हो गया.... उसकी आंखें कमज़ोर हो गई हैं तभी तो आज देश के कई बच्चे स्कूल जाने के बजाये किसी दुकान, कोठी या कूड़ा बीन कर अपने पेट की आग बुझाने को मजबुर है...... कहा जाता है बच्चे देश का भविष्य होते हैं तो हमारे देश का का भविष्य दुकानों, कोठीयों और कूड़ेदानों में काम करता नज़र आता है..... पता नहीं बालश्रम को रोकने के लिए कितने क़ानून बनाए गए मगर उस को लागू करने की ज़िम्मेदारी किसकी है??????
भारत बूढा हो गया.... तभी तो हमारा एक पड़ोसी लगातार हमारी ज़मीन पर अपना दावा पेश करता है और हम चुपचाप रहते हैं.......
भारत बूढा हो गया.... तभी तो ऑस्ट्रेलिया में लगातार भारतीयों पर हमले होते हैं और हम उनसे इस मामले पर जवाब भी नहीं मांग पाते हैं.......
भारत बूढा हो गया.... तभी तो कोई हमारी ग़रीबी का मज़ाक उड़ाकर ऑस्कर पा लेता है और हम खुश हो जाते हैं......
भारत में एक खेल (क्रिकेट) के खिलाड़ियों पर धन की वर्षा होती है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय खेल (हॉकी) के खिलाड़ी अपना खर्च भी उठा पाने में असमर्थ हैं....... क्या भारत सचमुच बुढ़ा हो गया है???????
मंगलवार, 26 जनवरी 2010
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