भारत और श्रीलंका के बीच पांचवां और अंतिम एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच फिरोजशाह कोटला की खतरनाक पिच के कारण रद्द कर दिया गया जिससे डीडीसीए के जीवंत विकेट और रोमांचक मैच के दावों की भी पोल खुल गई। 23 ओवर का खेल होने के बाद श्रीलंकाई कप्तान संगाकारा ने पिच को लेकर आपत्ति जताई और इसके बाद खेल रोक दिया गया। पिच पर उछाल को खतरनाक बताते हुए श्रीलंकाई टीम ने खेलने से इनकार कर दिया और इस के बाद दोनों टीमें मैदान छोडकर लौट गई । तब मैच रेफरी एलन हर्स्ट ने अंपायरों और डीडीसीए के अधिकारियों के साथ पिच का निरीक्षण किया और दोनों टीमों के कप्तानो और अधिकारियों के बीच विमर्श के बाद मैच को रद्द करने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि टेस्ट के बाद इस पिच की आलोचना के बाद यहां पर नया पिच तैयार करवाया था। उम्मीद की जा रही थी सुबह नमी के बाद पिच सामान्य रूप से खेलने लगेगा लेकिन 23 ओवर से ज्यादा का खेल होने के बाद भी उछाल कम नहीं होते देख श्रीलंकाई कप्तान ने आपत्ति जताई। मैच रुकने से पहले फिरोज़शाह कोटला में हो रहे श्रृंखला के अंतिम वनडे में श्रीलंका ने पांच विकेट खोकर 83 रन बना लिए थे। ज़हीर खान ने ने बेहतरीन शुरुआत देते हुए मैच की पहली ही गेंद पर उपुल थरंगा को पेवेलियन भेजा। भारत ये श्रृंखला 3-1 से जीत चुका है। गौरतलब है कि आज सुबह मैच शुरू होने से पहले भारत के महान बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने इस पिच की आलोचना करते हुए मैच नहीं कराने की सलाह दी थी मगर मैच शुरू हुआ और उसके बाद जो हुआ वो भारत को शर्मशार कर गया।
दर्शकों का हंगामा
मैच के रद्द होने कि खबर सुनते ही दर्शकों ने अपना सब्र खोकर मैदान में बोतलें कागज और सीटों के कपडे के कवर फाडकर फेंकने लगे हैं। तत्काल ही मैदान के अंदर और स्टेडियम के आसपास पुलिस के कडे सुरक्षा प्रबंध कर दिए गए ताकि किसी भी तरह का दंगा फसाद रोका जा सके। स्टेडियम के बाहर की मुख्य सडक पर दंगारोधी वाहन भी तैनात कर दिया गया। पुलिस हर तरफ मुस्तैद दिखाई दे रही थी। डीडीसीए ने दर्शकों से माफ़ी मंगाते हुए टिकट के पैसे भी लौटाने की बात कही है। कोटला वनडे रद्द होने के बाद डीडीसीए के अध्यक्ष अरुण जेटली पवेलियन की तरफ सीमा रेखा के बाहर गहरी चिंता में डूबे हुए थे और डीडीसीए के अधिकारियों के चेहरों पर हवाईयां उडी हुई थी। डीडीसीए के इतिहास में संभवतः यह पहला मौका होने जा रहा था कि जब किसी मैच को खराब पिच के कारण रद्द किया गया हो।
भारत में मैच रद्द होने का इतिहास
भारत मे खतरनाक पिच के कारण मैच रद्द होने का ये दूसरा वाकया है , आज से ठीक 12 साल पहले 25 दिसंबर 1997 को भी इंदौर के नेहरू स्टेडियम में हो रहे मैच को बीच में रोक कर रद्द करना पड़ा था। मजेदार बात है कि उस वक्त भी मैच भारत और श्रीलंका के बीच ही हो रहा था।
आईसीसी लगा सकता है प्रतिबंध
भारत और श्रीलंका के बीच पांचवां और अंतिम एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खतरनाक पिच होने के कारण रद्द किए जाने के बाद फिरोजशाह कोटला मैदान पर दो साल का प्रतिबंध लगने और उससे 2011 के विश्वकप के मैच छिने जाने की आशंका मंडराने लगी है।दोनों टीमों के बीच पांचवां वनडे 23.3 ओवर के बाद पिच की खतरनाक स्थिति के कारण रद्द कर दिया गया। इस मैच के रद्द होने से कोटला में विश्वकप मैच आयोजित करने की संभावनाएं भी खटाई में पड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की खराब पिचों के संबंध में नई आचार संहिता में कहा गया है कि इस तरह के पहले उल्लंघन पर मैच स्थल का अंतरराष्ट्रीय दर्जा 12 महीने से लेकर 24 महीने तक निलंबित हो सकता है। जिसके साथ यह भी प्रावधान है कि उसे अपनी स्थिति में सुधार करने के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय दर्जा पाने के लिए आईसीसी से फिर से मान्यता हासिल करनी होगी। इंदौर के नेहरू स्टेडियम में 25 दिसंबर 1997 को भारत और श्रीलंका के बीच एकदिवसीय श्रृंखला का दूसरा मैच भी इसी तरह पिच के खतरनाक हो जाने के कारण रद्द कर दिया गया था। उस समय मैच मात्र तीन ओवर बाद रद्द हो गया था। श्रीलंकाई टीम तब एक विकेट पर 17 रन ही बना पाई थी। तीसरे ओवर के बाद दोनों टीमों के कप्तानों अर्जुन रणतुंगा और सचिन तेंदुलकर ने महसूस किया कि पिच खिलाडियों के लिए खतरनाक है और मैच रेफरी ने मैच रद्द करने की घोषणा कर दी। मैच रद्द होने के बाद इंदौर पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें