नाज़ है मुझे उस पर जो आज मेरे पास नहीँ,
मगर आज भी उसकी यादेँ मेरे दिल की
वीरान गलियोँ को एक ताज़े फूल की तरह मह्का रही है,
वो मेरे दिल कि धड़कन, मेरे सांसों की ज़रुरत है,
उसके न होने पर भी उसके होने का एहसास है,
वो दूर है मुझ से फिर भी मेरे के दिल पास है,
इसलीए वो मेरी ख़ास है।
बुधवार, 25 मार्च 2009
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vakwas band kar nadim bihari
जवाब देंहटाएंnahi naddo bht badiya hai i like it
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